"पारसि सिंग चांदो" पंडित रघुनाथ मुर्मू के द्वारा सन् 1925 मे संताली भाषा के लिए" ओलचिकि " लिपि की आविष्कार किया था। 2925 में उसकी 100 साल पूरी हो रही है. उसी के उपलक्ष मे श्री सूर्य सिंह बेसरा को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की कर कमलों से उत्कृष्ट साहित्य सम्मान से विभूषित किया जाएगा. उस दिन सूर्य सिंह बेसरा की स्वर्णिम दिन होगा, जो उन्होंने अपने संघर्ष जीवन का 50 वर्ष तथा 70 साल की उम्र भी पूरा कर रहे है.
श्री सूर्य सिंह बेसरा एक बहु आयामी प्रतिभाशाली व्यक्तित्व है, जो फाइटर और राइटर भी है. श्री बेसरा झारखण्ड राज्य निर्माताओं में से एक हैं, जिन्होंने 1986 में "ऑल झारखंड स्टुडेंट्स यूनियन" (आजसू) का गठन कर 1989 में 72 घंटे झारखंड बंद के परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में झारखंड आंदोलन के इतिहास में पहली बार झारखंड अलग राज्य मुद्दे पर दिल्ली वार्ता का नेतृत्व प्रदान किया. वह एकलौते विधायक थे, जिन्होंने झारखंड राज्य की मांग पर बिहार विधानसभा से त्याग पत्र दिया था. सूर्य सिंह बेसरा 1986 में रांची विश्व विद्यालय के अंतर्गत जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग रांची से संताली भाषा में "स्नातकोत्तर" मास्टर डिग्री पास किया था. उन्होंने 2004 में"जानाम दिशोम झाड़खंड " नामक संताली कविता में एक पुस्तक प्रकाशित किया था. उसी वर्ष उन्होंने कबीर अमृतवाणी गीत के तर्ज पर "बेसरा बिनती" (संताली अमृतवाणी) की रचना की थी, जिसकी गायक संताली लता रानी मारडी द्वारा सुर संगीत प्रस्तुति की गई थी, जो टी सिरीज़ द्वारा प्रचारित और प्रसारित किया गया है. विश्व कवि रविन्द्र नाथ ठाकुर द्वारा रचित 1913 में नोबेल पुरष्कृत " गीतांजलि" का संताली में 2013 में अनुदित कर श्री सूर्य सिंह बेसरा ने एक अविस्मरणीय कृति की है, सिर्फ यही नहीं बल्कि डॉ हरि वंश राय बच्चन की महाकाव्य" मधु शाला " का संताली में अनुवाद किया है.इन कीर्तिमान के वजह से सूर्य सिंह बेसरा को 2917 में उन्हें साहित्य अकादेमी नई दिल्ली द्वारा अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित कर गर्व हासिल किया है. श्री बेसरा ने 2015 में "ख़बर कागज़" नामक संताली में दैनिक अखबार जमशेदपुर से प्रकाशित कर विश्व रिकार्ड बनाया है.सिर्फ यही नहीं बल्कि उन्होंने 2017 में घाटशिला स्थित लेदा, दामपड़ा में संताल विश्वविद्यालय की स्थापना किया है. श्री बेसरा ने साहित्य जगत में अतुलनीय रचनाएं की हैं. संताली में उनमें से प्रमुख है बेसरा गालाअंग.. बिलीद बालांग बेसरा थुति;आकिल पुथी, चेदग मोनेम नोंकाना, लंडायसेम भावनाया?, श्री सूर्य सिंह बेसरा यह मानते है कि वे कोविड में (करूणा) में मारनपाश्चात उनका पुनर्जन्म हुआ है.. उसी समय उन्होंने"चांदो सिरजोन हाहाड़ा गे" नामक एक आध्यात्मिक पुस्तक की रचना की है, जो अद्वितीय है. श्री बेसरा की दस उपलब्धियों के अलावे दस उपाधियां भी प्राप्त है, उनमें से प्रमुख है: झाड़खंड रत्न, भारत सेवा रत्न, झाड़खंड आंदोलनकारी सेनानी, उत्कृष्ट विधायक, विश्व संताली कवि, झाड़खंड राज्य निर्माता, और 2025 में उन्हें भारत दिशोम माहली माझी पारगाना माहाल" द्वारा अंतर्राष्ट्रीय माहालीआदिवासी दिवस पर जमशेदपुर में "धरती सिंग चांदो" का सम्मान देकर पद्मभूषित किया गया है.
संकलन: कालीदास मुर्मू, संपादक आदिवासी परिचर्चा।

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