पीवीटीजी विट्टा समृद्धि ग्राम ( पीवीटीजी- वी-समग्र) नामक यह पहल राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से शुरू की गई है.
सूत्रों के अनुसार, इसे 27 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश में शुरू किया गया था. इसके पहले चरण का लक्ष्य मार्च 2027 तक मध्य प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में लगभग 200 चयनित आदिम जनजाति समूहों के गांवों को आच्छादित करना है. जिसमें प्रत्येक राज्य में लगभग 50 गांव होगें.
मंत्रालय सचिव रंजन चोपड़ा ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय जागरूकता में अंतराल को पुरा करना है. जो अक्सर बैक और अन्य वित्तीय सुविधाओं की उपस्थिति के बावजूद दूरदराज़ के क्षेत्रों में आदिवासी परिवारों को संस्थागत ऋण तक पहुंचाने से रोकता है.
यह लाभार्थियों को रियायती ऋण योजनाओं, बैंकिंग प्रक्रियाओं पात्रता मानदंडों और दस्तावेजीकरण आवश्यकताओं से परिचित कराएगा, साथ ही ऋण आवेदन प्रस्तुत करने में सहायता भी प्रदान करेगा. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सीधी और सिंगरौली जिलों और ओड़िशा के मलकानगिरी जिले में अब तक सात वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित किए गए हैं. जबकि मध्य प्रदेश के मुरौना जिला में आठ और ओड़िशा के गजपति जिले के लिए तीन अन्य शिविर की योजना बनाई गई है.
रिपोर्ट एवं संकलन: कालीदास मुर्मू, संपादक आदिवासी परिचर्चा।

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