द्वितीय सत्र में संताली समुदाय में गुरु गोमके द्वारा रचित "हितल" के महत्व तथा वर्तमान एवं भविष्य के परिप्रेक्ष्य में ओल चिकि के साथ सरकारी योजनाओं प्रभाव पर आधारित था. इस सत्र में मेघराय टुडू, पूर्व प्रबंधक, युसिल, जादुगोड़ा, लेखक एवं समीक्षक भुजंग टुडू, संपादक मागात मुर्मू निपोल रघु मुर्मू, कान्हु टुडू, नाजिर टुडू एवं जितेन हेम्ब्रम ने चर्चा में शामिल हुए.
द्वितीय दिन के प्रथम सत्र में संताली व्याकरण द्वारा ओल चिकि लिपि का सही प्रयोग एवं व्यवहार पर चर्चा हुई जिसमें संताली साहित्य के चैतन्य प्रसाद मांझी, संयोजक, साहित्य अकादमी, भीमवार मुर्मू, गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के पोते, वरिष्ठ लेखक एवं समीक्षक सोभानाथ बेसरा, डॉ जितेन्द्र नाथ बेसरा संकायाध्यक्ष, बाघराय हेम्ब्रम तथा बोयला सोरेन ने अपने वक्तव्य रखा.
द्वितीय सत्र में सामाजिक विज्ञान के संताली और उनके पारम्परिक स्वशासन व्यवस्था पर आधारित रही. इस सत्र में सुभाषचंद्र मार्डी, संपादक मोहन चंद्र बास्के, पारगाना बाबा बैजू मुर्मू, समाजसेवी बावलू मुर्मू, एवं छोटराय बास्के, आसेका बिहार, ने सम्मेलन को संबोधित किया.
इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य व सांरश है:
संताली भाषा एवं साहित्य को डिजिटल मंच से जोड़ने, ओल चिकि लिपि का व्यापक उपयोग में लाने, संताली भाषा को ओल चिकि से प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक की व्यवस्था को मजबूतीकरण तथा शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में संताली की संभावनाओं को विकसित पर बल दिया. साथ ही नई पीढी के युवाओं को अपनी मातृभाषा, इतिहास, परम्परा, सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक पर चर्चा की गई. संयुक्त रूप से वक्ताओं ने कहा कि अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन केवल अतीत को सहेजना नहीं। बल्कि आने वाले पीढ़ियों के लिए अपनी अस्मिता व विरासत को बचाएं रखना है.
मुख्यमंत्री के नाम विधायक को सौंप ज्ञापन:
इस अवसर पर आसेका द्वारा संताली भाषा, ओल चिकि लिपि को शिक्षा का माध्यम बनाने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं विकास से जुड़े 11 सूत्री मांगों को लेकर स्थानीय विधायक सोमेश सोरेन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा गया. संस्था ने राज्य सरकार से संताली भाषा और शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की. मांगपत्र में संताली भाषा को की राजकीय भाषा घोषित करने, सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में ओल लिपि के माध्यम से संताली भाषा की पढ़ाई सुनिश्चित करने, तथा उच्च विद्यालय में संताली भाषा शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांगों की गई है. इसके अलावा महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में संताली भाषा के व्याख्याता पद सृजित कर नियुक्ति करने, झारखंड संताली अकादमी का गठन करने तथा प्राथमिक से उच्चतर स्तर तक संताली भाषा के शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय स्थापित करने की शामिल हैं.
मैट्रिक एवं इन्टरमीडिएट की परीक्षाओं में संताली माध्यम के लिए ओल लिपि का प्रयोग किया जाय:
संस्था ने झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) मैट्रिक एवं इन्टरमीडिएट परीक्षाओं में संताली भाषा के माध्यम से परीक्षार्थी को ओल चिकि लिपि में उत्तर लिखने की प्रावधान सुनिश्चित करने तथा झारखंड की सभी आदिवासी भाषाओं को विकास एवं संरक्षण के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह किया है.
घाटशिला कॉलेज का नाम बदलकर मांझी रामदास टुडू स्मारक महाविद्यालय करने की मांग:
संस्था के मांगपत्र में यह जिक्र किया गया है कि बाहा, सहराय एवं साकरात जैसे प्रमुख संताली त्योहार तथा ओल चिकि लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर सरकारी अवकाश घोषित करने एवं कोल्हान यूनिवर्सिटी के अंगिभूत घाटशिला कॉलेज का नाम बदलकर मांझी रामदास टुडू स्मारक महाविद्यालय करने की भी मांग रखीं गई है.
रिपोर्ट एवं संकलन: कालीदास मुर्मू संपादक आदिवासी परिचर्चा।



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