प्राकृतिक खेती से बदली रही है ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला किसान मादई सोय बनी प्ररेणा स्रोत


 


चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ  प्रखंड अंतर्गत देवाबीर गांव की महिला किसान श्रीमती मादईु सोय ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर कम भूमि में बेहतर आमदनी का उदाहरण प्रस्तुत किया है.  राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद उन्होंने महज 15 डिसमिल भूमि पर मिश्रित फसल मॉडल अपनाकर इस सीजन में ₹14,000 की कुल आय तथा ₹12,030 का शुद्ध लाभ अर्जित किया है. 

रासायनिक खेती की बढ़ती लागत से प्राकृतिक खेती की ओर कदम: 

श्रीमती मादईु सोय के पास मात्र 15 डिसमिल मध्यम भूमि है. पहले वे रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भर थीं, जिसके कारण खेती की लागत बढ़ रही थी और मुनाफा कम होता जा रहा था.  साथ ही अत्यधिक रसायनों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने की स्थिति भी सामने आ रही थी. प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी के अभाव में उनके लिए इस स्थिति से बाहर निकलना कठिन था.

 एनएमएनएफ प्रशिक्षण ने दिखाई नई राह:

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत मादईु सोय को प्राकृतिक खेती की विभिन्न विधियों का प्रशिक्षण दिया गया. सीआरपी विशेषज्ञों एवं संबंद्ध संस्था के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने जीवामृत, नीमास्त्र, अग्निअस्त्र, अंडा टॉनिक एवं सुपर कम्पोस्ट जैसे जैविक इनपुट तैयार करने और उनका उपयोग करने की जानकारी हासिल की.  इन प्राकृतिक इनपुट के उपयोग से रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम हुई तथा फसल उत्पादन में प्राकृतिक तरीकों को अपनाने का अवसर मिला.

 एक ही खेत में कई फसलों का उत्पादन : 

प्रशिक्षण के बाद मादईु सोय ने अपनी 15 डिसमिल भूमि पर मिश्रित फसल मॉडल अपनाते हुए टमाटर, पालक, लाल पालक, मूली एवं धनिया की एक साथ खेती की. नियमित खेत निगरानी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप पूरे सीजन में 12 बार फसल की कटाई हुई. इस पूरी प्रक्रिया में भूमि तैयारी, बीज, प्राकृतिक इनपुट एवं श्रम सहित कुल लागत मात्र ₹1,970 रही.

 2.5 क्विंटल रसायनमुक्त सब्जियों का उत्पादन, ₹12,030 का शुद्ध लाभ:

प्राकृतिक खेती से इस सीजन में कुल 2.5 क्विंटल रसायनमुक्त एवं पौष्टिक सब्जियों का उत्पादन हुआ. बाजार में इन सब्जियों की मांग और उचित मूल्य मिलने से टमाटर की बिक्री से ₹10,000 तथा अन्य सब्जियों से ₹4,000 की आय प्राप्त हुई. इस प्रकार कुल आय ₹14,000 रही। ₹1,970 की कुल लागत घटाने के बाद मादईु सोय को ₹12,030 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ.

 मिट्टी की सेहत और परिवार की खाद्य सुरक्षा में भी सुधार:

प्राकृतिक खेती के आर्थिक लाभ के साथ खेत की मिट्टी की स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया. जैविक इनपुट के नियमित उपयोग से भूमि की उर्वरता में वृद्धि हुई और रासायनिक अवशेषों से मुक्ति की दिशा में लाभ मिला. परिवार को खेत से ही स्वस्थ एवं सुरक्षित सब्जियां उपलब्ध होने से खाद्य सुरक्षा में भी सुधार हुआ. मादईु सोय की सफलता से गांव के अन्य किसान भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं.


लागत घटी और आमदनी बढ़ी : 

श्रीमती मादईु सोय ने अपनी सफलता साझा करते हुए कहा कि एनएमएनएफ योजना से पहले वे रासायनिक खाद और दवाइयों पर निर्भर थीं, जिससे खर्च अधिक और फायदा कम होता था. प्रशिक्षण के माध्यम से उन्होंने जीवामृत, नीमास्त्र और अन्य प्राकृतिक इनपुट स्वयं तैयार करना सीखा. उनके अनुसार, इससे फसल स्वस्थ रही, लागत कम हुई और आमदनी बढ़ी.

 गांव की किसानों को प्राकृतिक खेती से मिल रही है प्ररेणा:

इस सफलता से उत्साहित श्रीमती मादईु सोय अगले सीजन में अपने खेत के अधिक हिस्से को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाना चाहती हैं. उनका लक्ष्य जीवामृत एवं अन्य जैविक इनपुट का उपयोग बढ़ाकर मिट्टी को और अधिक उपजाऊ बनाना तथा गांव की अन्य महिला किसानों को भी प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना है. वे सामूहिक रूप से स्वस्थ एवं रसायनमुक्त कृषि समुदाय के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं.

संग्रहकर्ता: बोध बोदरा,  उप-संपादक आदिवासी परिचर्चा।

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