350 करोड़ साल पुरानी चट्टानों में जीवन के प्रमाण मिले : झारखंड के भीतरडाडी संताल गांव में


जामशेदपुर: झारखंड की धरती केवल प्राकृतिक संपदा और खनिजों के लिए ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के प्राचीन इतिहास को अपने भीतर संजोए रखने के लिए भी दुनिया में विशेष महत्व रखती है. पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर प्रखंड अंतर्गत केरूआडूंगरी पंचायत के भीतरडाडी गांव के समीप लगभग 350 करोड़ (3.5 अरब) वर्ष पुरानी चट्टानों में प्रारंभिक जीवन के महत्वपूर्ण रासायनिक संकेत मिलने की खबर सामने आई है. वैज्ञानिक दृष्टि से यह खोज बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

  भीतरडाडी के गांव के चट्टानों में  क्या मिला :-

वर्ष 2014 में भूवैज्ञानिक अध्ययन के दौरान भीतरडाडी क्षेत्र की सिलिका-समृद्ध चर्ट चट्टानों में काली और सफेद धारियां दिखाई दी थी. शुरुआत में इन्हें सामान्य भूवैज्ञानिक संरचना माना गया, लेकिन बाद में इन पर अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से विस्तृत अध्ययन किया गया.

लेजर रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी और कार्बन आइसोटोपिक विश्लेषण सहित विभिन्न वैज्ञानिक जांचों से संकेत मिले कि चट्टानों की काली धारियां केवल निर्जीव खनिज संरचना नहीं हैं, बल्कि इनमें लगभग 3.5 अरब वर्ष पुराने सूक्ष्म जीवीय आवरण (Microbial Mat) के जीवाश्मीकृत अवशेष होने के प्रमाण मौजूद हैं.

 सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि—प्रत्यक्ष डेटिंग:-

इस खोज की खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने चट्टानों की उम्र का प्रत्यक्ष वैज्ञानिक काल-निर्धारण (Direct Dating) किया. अध्ययन में इन चट्टानों की उम्र लगभग 3.497 अरब वर्ष निर्धारित की गई.

इससे यह समझने में मदद मिलती है कि सिंहभूम क्रेटॉन में लगभग 3.5 अरब वर्ष पहले भी जीवन मौजूद था.

 350 करोड़ साल पहले कैसा था यह क्षेत्र :-

आज जहां भीतरडाडी गांव और आसपास का क्षेत्र दिखाई देता है, करोड़ों वर्ष पहले इसकी भौगोलिक परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं.

वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार उस समय यह क्षेत्र उथले समुद्री जल और ज्वालामुखीय गतिविधियों से प्रभावित रहा होगा. गर्म और खनिजों से भरपूर वातावरण शुरुआती सूक्ष्मजीवों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान कर सकता था. चट्टानों में पाए गए कार्बन आइसोटोप से भी ऐसे संकेत मिले हैं कि उस समय मौजूद सूक्ष्मजीव कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बनिक पदार्थों में बदलने जैसी जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रहे होंगे.

दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज: 

पृथ्वी की उम्र लगभग 460 करोड़ वर्ष मानी जाती है. ऐसे में करीब 350 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानों में जीवन के प्रमाण मिलना पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और उसके शुरुआती विकास को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

दुनिया के अन्य हिस्सों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में भी प्राचीन जीवन के प्रमाण मिले हैं. लेकिन भीतरडाडी की चट्टानों की विशेषता यह है कि यहां उनके काल-निर्धारण के लिए प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रमाण प्राप्त हुए हैं.

झारखंड के लिए गौरव का विषय :-

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की वरिष्ठ वैज्ञानिक त्रिस्रोता चौधरी के नेतृत्व में भारत, यूरोप और अमेरिका के वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस महत्वपूर्ण अध्ययन को पूरा किया. शोध को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित किया गया है.

सिंहभूम क्रेटॉन पहले से ही पृथ्वी की प्राचीन महाद्वीपीय भूपर्पटी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है.अब केरूआडूंगरी पंचायत के भीतरडाडी गांव का नाम भी पृथ्वी पर जीवन की शुरुआती कहानी से जुड़ गया है. हमारे लिए यह सिर्फ एक वैज्ञानिक खोज नहीं, बल्कि अपनी धरती और विरासत पर गर्व करने का अवसर है.

संग्रहकर्ता/संकलन: कालीदास मुर्मू, संपादक,आदिवासी परिचर्चा।

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