युवाओं के साथ पुलिस का व्यवहार बेहद शर्मनाक, पीएम मोदी सुनें उनकी बात: प्रियंका गांधी


नई दिल्ली: नीट से जुड़े विवाद और 20 जुलाई को दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की.  उन्होंने प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ पुलिस के व्यवहार को बेहद शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि सरकार को बल प्रयोग करने के बजाय छात्रों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवा किसी राजनीतिक कारण से नहीं बल्कि अपने भविष्य को लेकर सड़क पर उतरे हैं. इन छात्रों की समस्याएं वास्तविक हैं और पूरा देश जानता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं और उनके परिवारों को किन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कई माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग के लिए कर्ज तक लेते हैं लेकिन बार-बार परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां और पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके भविष्य पर गंभीर असर डाल रही हैं.
उन्होंने पीएम मोदी से अपील करते हुए कहा कि उन्हें कम से कम छात्रों से मिलकर उनकी बात सुननी चाहिए. छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं क्योंकि उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही खामियों की जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालय की है. एक समय ऐसा था जब किसी बड़ी प्रशासनिक विफलता पर मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देते थे लेकिन अब ऐसा देखने को नहीं मिलता है. उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की भी मांग की.
प्रियंका ने कहा कि आज देश का युवा निराश और आक्रोशित है क्योंकि उसे अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस हो रही है. हर छात्र संघर्ष कर रहा है और उसे यह चिंता सता रही है कि मेहनत के बावजूद यदि परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष नहीं होगी तो उसका भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा. यह केवल छात्रों का मुद्दा नहीं है बल्कि उन लाखों परिवारों का भी सवाल है जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक और मानसिक संघर्ष कर रहे हैं. प्रियंका ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार युवा-विरोधी, गरीब-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियां अपना रही है। सरकार को छात्रों की आवाज सुननी चाहिए, जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए.

संग्रहकर्ता एवं संकलन: बोध बोदरा, उप-संपादक।

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