सर्वेक्षण का समय और कार्यप्रणाली:-
यह वृहद सर्वेक्षण और बंदोबस्त (Survey and Settlement) का कार्य 1902 में शुरू हुआ और इसका मुख्य चरण लगभग 1910 तक चला।इस विशाल कार्य का नेतृत्व ब्रिटिश सेटलमेंट ऑफिसर जे. रीड (J. Reid) और मिशनरी जॉन हॉफमैन ने किया था.
अंग्रेजों ने भूमि के सर्वे के लिए एक चरणबद्ध और वैज्ञानिक पद्धति अपनाई, जिसे कई स्तरों में विभाजित किया गया था.
1. ट्रैवर्स सर्वे (Traverse Survey):- सबसे पहले थियोडोलाइट (Theodolite) नामक वैज्ञानिक उपकरण का उपयोग करके गाँव की बाहरी सीमाओं को मापा गया और उन्हें मानचित्र पर अक्षांश-देशांतर के साथ तय किया गया.
2. किस्तवार (Kistwar):- इसके अंतर्गत गाँव की भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों (प्लॉट) में विभाजित किया गया और प्रत्येक खेत का एक विस्तृत नक्शा (कैडस्ट्रल मैप) तैयार किया गया.
3. खानापूरी (Khanapuri) :- नक्शा बन जाने के बाद, मौके पर जाकर प्रारंभिक रिकॉर्ड तैयार किया गया. इसमें प्रत्येक खेत (प्लॉट) के वास्तविक मालिक का नाम, भूमि की प्रकृति (जैसे दोन, टांड़), और उस पर देय लगान दर्ज किया गया.
4. बुझारत और तस्दीक (Bujharat and Tasdik):- तैयार किए गए इस 'अधिकार अभिलेख' (Record of Rights) को गाँव वालों के सामने पढ़कर सुनाया गया (बुझारत) ताकि वे इसे समझ सकें. यदि कोई आपत्ति होती, तो राजस्व अधिकारी वहीं उसका निपटारा करता और फिर उस रिकॉर्ड का अंतिम रूप से सत्यापन (तस्दीक) किया जाता था.
इस अत्यंत जटिल और श्रमसाध्य प्रक्रिया में लगभग 8 से 9 वर्ष का समय लगा. इस सर्वेक्षण का सबसे बड़ा परिणाम यह हुआ कि जो आदिवासी अधिकार सदियों से केवल मौखिक परंपराओं पर आधारित थे, उन्हें पहली बार 'खतियान' (Khatian) के रूप में लिखित और वैधानिक मान्यता प्राप्त हुई.
5. सीएनटी एक्ट का मूल उद्देश्य:- छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों (दिक्कुओं) के हाथों में जाने से रोकना था.
यह अधिनियम कोई सामान्य राजस्व वसूली कानून नहीं था, बल्कि बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए उठाया गया एक निरोधात्मक कदम था.
अधिनियम के मूल उद्देश्यों में शामिल हैं:-
● जमींदारों और ठेकेदारों द्वारा की जा रही आदिवासियों की मनमानी & बेदखली (eviction) पर रोक लगाना.
● आदिवासी समाज की पारंपरिक भूमि प्रणालियों (जैसे मुंडारी खूंटकट्टी और भुईंहरी) को कानूनी सुरक्षा और ढांचा प्रदान करना.
● छोटानागपुर क्षेत्र की जनसांख्यिकी (Demographic structure) को संरक्षित करना, ताकि मूल निवासी अपनी ही भूमि पर अल्पसंख्यक न बन जाएं.
● एक ऐसा पारदर्शी राजस्व तंत्र स्थापित करना जहाँ लगान की दरें तय हों और 'बैठ-बेगारी' जैसे अमानवीय शोषण को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके.
6. सीएनटी एक्ट में व्यवहृत महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावली (Definitions & Commentary):- अधिनियम के विधिक प्रावधानों को आम ग्रामीणों की समझ के योग्य बनाने हेतु, इसमें प्रयुक्त विशिष्ट शब्दावली का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। नीचे दी गई तालिका में अधिनियम में प्रयुक्त कुछ महत्वपूर्ण शब्दों की सरल परिभाषा और उन पर विश्लेषणात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की गई है:-
मुंडा :- मुंडारी प्रशासनिक व्यवस्था में गाँव का पारंपरिक मुखिया (Headman). यह न केवल एक विशिष्ट और प्रमुख जनजाति का नाम है, बल्कि शासन व्यवस्था में सम्मानसूचक पदवी भी है. सीएनटी एक्ट में 'मुंडा' को राजस्व संकलन और गाँव के प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है.
दिकू:- आदिवासी समाज द्वारा बाहरी लोगों के लिए प्रयुक्त शब्द. विशेषकर शोषक जमींदार, साहूकार, ठेकेदार और व्यापारी, जो मैदानी इलाकों से आकर आदिवासियों का आर्थिक और सामाजिक शोषण करते थे. सीएनटी एक्ट इन्हीं दिक्कुओं से आदिवासियों की रक्षा के लिए लाया गया था.
खूंट :- इसका शाब्दिक अर्थ है 'वंश' (Lineage) या गोत्र. आदिवासी समाज में वे सभी लोग जो एक ही पुरुष पूर्वज (common male ancestor) के रक्त-संबंधी वंशज हैं, एक 'खूंट' का निर्माण करते हैं.
खतियान :- भूमि के 'अधिकार अभिलेख' (Record of Rights) का वह सबसे महत्वपूर्ण रजिस्टर है जिसमें रैयत का नाम, जमीन का पूरा विवरण, रकबा, चौहद्दी और उस पर देय लगान का आधिकारिक उल्लेख होता है.
खूंटकट्टी :- 'खूंट' (वंश) द्वारा 'कट्टी' (जंगल काटकर) बनाई गई कृषि योग्य भूमि. सीएनटी एक्ट यह स्वीकार करता है कि इस भूमि पर किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस जंगल को साफ करने वाले पूरे वंश का सामूहिक और अहस्तांतरणीय अधिकार होता है.
भुइन्हरी :- उरांव और अन्य संबंधित जनजातियों के मूल संस्थापकों द्वारा बसाई गई जमीन. इसे 'विशेषाधिकार प्राप्त भूमि' माना जाता है। सीएनटी एक्ट से बहुत पहले, 1869 के 'छोटानागपुर टेन्योर्स एक्ट' के तहत इस भूमि का विशेष सर्वे किया गया था.
सरना:- आदिवासियों का पवित्र उपवन (Sacred Grove) जहाँ वे अपने देवी-देवताओं और प्रकृति की उपासना करते हैं। सीएनटी एक्ट में इस भूमि को लगान मुक्त और अहस्तांतरणीय रखा गया है.
ससन/ मसना:- आदिवासियों का वह पवित्र और पारंपरिक कब्रिस्तान जहाँ उनके पूर्वजों की हड्डियां बड़े पत्थरों (ससन दिरी) के नीचे दफन की जाती हैं। *यह उनके भूमि स्वामित्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक प्रमाण है.
सिंगबोंगा:- आदिवासियों (विशेषकर मुंडा, हो, संताल) के सिंग= सर्वोच्च/सूर्य; बोंगा=ईश्वर,देव,देवता (सर्वोच्च ईश्वर या सूर्य देव) जो प्रकाश, जीवन और सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं। आदिवासी जीवन पद्धति पूर्णतः इनके इर्द-गिर्द घूमती है.
बैठ-बेगारी :- जमींदारों द्वारा आदिवासियों से बिना कोई मजदूरी दिए जबरन खेतों या घरों में काम कराने की शोषक प्रथा.सीएनटी एक्ट के धारा - 62 में इसे अमानवीय प्रथा को गैर-कानूनी घोषित कर दिया.
मझियास जमीन:- वह विशेषाधिकार प्राप्त भूमि जो जमींदारों (Landlords) के पूर्णतः व्यक्तिगत उपयोग के लिए आरक्षित थी. इस भूमि पर रैयतों का कोई अधिकार नहीं होता था.
उलगुलान:- इसका अर्थ है 'महान विद्रोह' या 'भयंकर हलचल' (Great Tumult)। यह शब्द भगवान बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक आंदोलन (1895-1900) के लिए प्रयोग होता है, जिसने सीएनटी एक्ट की नींव रखी.
कमिश्नर / डिप्टी कमिश्नर:- राजस्व और नागरिक प्रशासन के शीर्ष ब्रिटिश अधिकारी. सीएनटी एक्ट में डिप्टी कमिश्नर (DC) को अभूतपूर्व शक्तियां दी गई हैं; जैसे भूमि हस्तांतरण की अनुमति देना, अवैध कब्जा हटाना, और मुकदमों का निर्णय करना.
Tenure / Land tenure (भू-धृति):- किसी व्यक्ति द्वारा सरकार या किसी अन्य बड़े जमींदार के अधीन भूमि धारण करने का अधिकार और उसकी विधिक शर्तें.
Cadastral survey:- भू-कर सर्वेक्षण. वैज्ञानिक तरीके (थियोडोलाइट आदि) से गाँव के हर खेत का सटीक नक्शा बनाना और उसकी सीमा तय करना (किस्तवार), जो अधिकारों के अभिलेख का आधार बनता है.
गाँव या ग्राम:- स्थानीय क्षेत्र जिसे सर्वेक्षण नक्शे में एक 'गाँव' (ग्राम) के रूप में सीमांकित किया गया हो या जिसे डिप्टी कमिश्नर द्वारा गाँव घोषित किया गया हो ।
Mundari khuntkattidari tenancy:- मुंडारी खूंटकट्टीदार का हित. ये न तो सामान्य रैयत हैं और न ही भू-धारक, बल्कि एक विशिष्ट प्रकार के काश्तकार हैं. सीएनटी एक्ट में इनके भूमि हस्तांतरण पर पूर्ण और कठोर रोक है.
Khuntkatti rights:- खूंटकट्टी अधिकार वे विशेष अधिकार हैं जो गाँव के उन मूल संस्थापकों के वंशजों को प्राप्त हैं जिन्होंने पहली बार कुल्हाड़ी चलाकर जंगल साफ किया था.
कोड़कर:- वह बंजर या जंगली भूमि जिसे किसी किसान ने अपने अथक श्रम से समतल करके पहली बार धान की खेती के योग्य बनाया हो. इस पर किसान को विशेष अधिभोगी अधिकार मिलते हैं.
थाना:- पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र. एक्ट की धारा 46 के तहत यह एक महत्वपूर्ण भौगोलिक सीमा है, क्योंकि एक आदिवासी अपनी जमीन केवल उसी 'थाना' क्षेत्र में रहने वाले दूसरे आदिवासी को ही बेच सकता है.
मौजा:- राजस्व ग्राम (Revenue Village). यह प्रशासनिक और भू-राजस्व आकलन की सबसे प्राथमिक भौगोलिक इकाई है, जिसके आधार पर खतियान तैयार होता है.
संग्रहकर्ता: कालीदास मुर्मू, संपादक आदिवासी परिचर्चा।


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