रांची/ जामताड़ा: मन में दृढ़ संकल्प हो, तो गांव की पग डंडी से निकल कर दुनिया के ऊंचाई तक पहुंच जा सकता है. ऐसा ही एक प्रतिभागी ने साबित कर दिखाया है झारखंड जामताड़ा जिला की एक संताल आदिवासी बेटी दिवाषी हेम्ब्रम ने.दिवाषी ने थाईलैंड में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय एयरगन सुटिंग प्रतियोगिता 2026 में भारतीय टीम की प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर न केवल झारखंड का वल्कि देश का नाम भी रोशन किया है. थाईलैंड में चार मई से सात मई तक आयोजित इस अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के बाद जब गृह जिला जामताड़ा पहुंची तो उसका जोरदार स्वागत किया. बताते चलें दिवाषी एक साधारण संताल किसान से आती है और पांच बहनों में से एक है. वह जामताड़ा जिले के कुड़हित प्रखण्ड अन्तर्गत छोटे से गांव ताराबाद के रहने वालीं है. वह सीमित सासंधन एवं आर्थिक कठिनाइयों के बाबजूद उन्होंने अपने स्वपनों को टूटने नहीं दिया. वर्तमान में दिवाषी हेम्ब्रम जामताड़ा कॉलेज की छात्रा है और स्नातक की पढ़ाई कर रही है. दिवाषी के इस सफलता के पीछे कड़ी मेहनत, लगन और परिवार की मज़बूत समर्थन रहा है. अपनी उपलब्धि पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए उन्होंने इसका पुरा श्रेय माता -पिता व शिक्षकों को दिया. उन्होंने कहा गांव की पग डंडी से निकल कर अन्तर्राष्ट्रीय एयरगन सुटिंग प्रतियोगिता रेंज तक का सफर आसान नहीं था. लेकिन मेरी दृढ़ता, परिवार की विश्वास और शिक्षकों की मार्गदर्शन उन्हें हमेशा से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. दिवाषी की इस ऐतिहासिक जीत ने पुरे झारखंड को गौरवान्वित किया है. जामताड़ा के सुदूरवर्ती छोटे गांव से निकल कर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर आना यह साबित किया है कि झारखंड की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, वल्कि उन्होंने निहारने की जरूरत है.
रिपोर्ट/ संकलन : कालीदास मुर्मू संपादक आदिवासी परिचर्चा।

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