नई दिल्ली: दुनिया भर में बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. गरीबी, भुखमरी, जलवायु परिवर्तन, युद्ध, हिंसा और सामाजिक असमानताओं के बीच करोड़ों बच्चे आज भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन से वंचित हैं. वैसे तो नियमानुसार प्रत्येक बच्चे को सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसरों का अधिकार है, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्थिति अभी भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है.
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार दुनिया के करोड़ों बच्चे हर साल किसी न किसी रूप में हिंसा, शोषण और भेदभाव का शिकार होते हैं. बच्चों के संरक्षण से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हर वर्ष करोड़ों बच्चे शारीरिक या मानसिक हिंसा का सामना करते हैं. इसके अलावा लाखों लड़कियां और लड़के यौन शोषण के शिकार बनते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों का बड़ा हिस्सा परिवारों के भीतर या बाल श्रम जैसी परिस्थितियों में सामने आता है.
बच्चों के सामने केवल हिंसा ही नहीं, बल्कि भुखमरी और कुपोषण भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं. खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट (जीआरएफसी) के अनुसार वर्ष 2024 में 53 देशों और क्षेत्रों में लगभग 29.5 करोड़ लोग तीव्र खाद्य संकट से प्रभावित रहे. वहीं, सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में करीब 1.82 करोड़ बच्चे ऐसे माहौल में जन्मे जहां परिवार गंभीर खाद्य असुरक्षा और भूख की स्थिति से जूझ रहे थे.
कुपोषण की स्थिति भी चिंताजनक:
कुपोषण की स्थिति भी चिंताजनक है. रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2024 में पांच वर्ष से कम आयु के 15 करोड़ से अधिक बच्चे अवरुद्ध शारीरिक विकास (स्टंटिंग) से प्रभावित थे, जबकि करोड़ों बच्चे दुबलापन और अन्य पोषण संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है.
वैश्विक संघर्ष और युद्ध भी बच्चों के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं. युद्धग्रस्त क्षेत्रों में स्कूलों पर हमले, विस्थापन और असुरक्षा के कारण लाखों बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं. जनवरी 2026 में जारी यूनीसेफ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 23 करोड़ 40 लाख से अधिक स्कूली आयु के बच्चे विभिन्न संकटों से प्रभावित रहे हैं. इनमें से लगभग 8.5 करोड़ बच्चे किसी भी प्रकार की शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि वर्ष 2026 के अंत तक 60 लाख अतिरिक्त बच्चे स्कूल से बाहर हो सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि वैश्विक भविष्य में निवेश है. ऐसे समय में जब दुनिया अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है, बच्चों को हिंसा, भुखमरी, भेदभाव और शिक्षा से वंचित होने से बचाना सरकारों, संस्थाओं और समाज की साझा जिम्मेदारी बन गई है.
संग्रहकर्ता एवं संकलन: कालीदास मुर्मू संपादक आदिवासी परिचर्चा।

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